छोटा सार
हर विकासात्मक बदलाव उपयोगिता के कारण नहीं होता। कभी-कभी आबादी केवल संयोग से बदलती है। इसी प्रक्रिया को आनुवंशिक बहाव (genetic drift) कहते हैं।
मुख्य विचार
मान लीजिए आप सिक्का दस बार उछालते हैं। पाँच बार चित और पाँच बार पट आना संभव है, लेकिन यह ज़रूरी नहीं। कम नमूनों में संयोग का असर ज़्यादा दिखाई देता है।
आनुवंशिक बहाव भी ऐसा ही है। अगली पीढ़ी वर्तमान पीढ़ी की एकदम सटीक प्रति नहीं होती, बल्कि एक नमूना होती है। संयोग से कुछ आनुवंशिक रूप ज़्यादा सामान्य हो सकते हैं और कुछ कम।
यह उपयोगिता नहीं, संयोग की कहानी है
यही बात इसे प्राकृतिक चयन से अलग करती है। प्राकृतिक चयन में कोई गुण इसलिए बढ़ता है क्योंकि वह किसी वातावरण में मदद करता है। आनुवंशिक बहाव में कोई गुण बिना किसी लाभ के भी फैल सकता है।
छोटी आबादियाँ अधिक क्यों प्रभावित होती हैं
अगर बहुत बड़ी आबादी में कुछ जीव संयोग से नष्ट हो जाएँ, तो आनुवंशिक मिश्रण में बहुत कम फर्क पड़ेगा। लेकिन छोटी आबादी में वही घटना बड़ा असर डाल सकती है।
इसीलिए बहाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है:
- छोटे द्वीपीय समूहों में
- आपदा के बाद कम हुई आबादियों में
- कुछ ही जीवों से शुरू हुई नई आबादियों में
bottleneck और founder effect
जब आबादी अचानक बहुत छोटी हो जाती है, तो उसे bottleneck कहा जाता है। बचे हुए जीव पहले की आबादी का छोटा नमूना होते हैं, इसलिए कुछ रूप केवल संयोग से गायब हो सकते हैं।
जब कुछ ही जीव नई आबादी शुरू करते हैं, तो founder effect होता है। नई आबादी मूल समूह की पूरी विविधता साथ नहीं लाती।
यह विकास को कैसे समझाता है
आनुवंशिक बहाव हमें याद दिलाता है कि विकास केवल अनुकूलन की कहानी नहीं है। इतिहास, नमूना आकार और संयोग भी किसी आबादी की दिशा बदल सकते हैं।